आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पहले अपना चेहरा निहारो

                
                                                         
                            अपना मुखड़ा दर्पण में देखो फिर औरों की बात करो,
                                                                 
                            
बुराई किसी की करने से पहले अपना मुखड़ा साफ करो।
अपने वजूद की सुरक्षा की खातिर दुश्मन पर प्रत्याघात करो,
मगर नहीं किसी के संग तुम कभी भीतरघात करो।।

ये दुनिया है अजब निराली टांग पकड़ कर खींचा करती,
अच्छे खासे जीवन में भी कितनी यह दुश्वारी भरती।
गर आगे बढ़ न सको तो कभी न किसी के संग घात करो,
जीवन में आगे बढ़ने हित प्रोत्साहित करने की बात करो।।

छोटा सा जीवन है इसमें प्रेम सद्भाव का बीजारोपण करो,
नहीं कभी जीवन में किसी मजबूर का तुम शोषण करो।
औरों को भी आगे बढ़ने दो निहित स्वार्थ का त्याग करो,
अपने संग औरों को बढ़ाने की तुम मिलजुलकर बात करो।।

पहले निहारो दर्पण में चेहरा तुम फिर औरों की बात करो,
अपने सुख की खातिर न कभी औरों के संग कोई घात करो।
संस्कारित शिक्षा का अब मिलजुलकर पूरा प्रचार करो,
दीपक बन कर चमक उठो मुरझाए जीवन में तुम प्रकाश भरो।।

गर कर न सको किसी का भला तुम तो नहीं किसी संग घात करो,
सुन्दर जीवन जीना है तो सबके संग प्रेम पूर्वक तुम बात करो।
नफ़रत की ज्वाला से बचकर रहना नहीं कभी आघात करो,
अपना चेहरा पोछो पहले फिर औरों के प्रति तुम बात करो।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर