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मन की कालिमा

                
                                                         
                            आज़ाद हुए हम सन् 47 में,
                                                                 
                            
पर क्या आज़ाद हुए हम
अपने मन की कालिमा से।

आज भी लड़ते हैं सब
हिन्दू-मुस्लिम की लड़ाई में,
ना हुई राम-रहमान की लड़ाई
तो फिर कैसी ये हाया-हाई।

किस मंदिर-मस्जिद की
करते हो तुम बात,
कैसे तुमने बाँट दिया
राम और रहमान।

पूछती है आज ये "रैना"
है कैसा ये घोर अन्याय।।

नाम: श्वेता (रैना)
कक्षा: 11वीं
जिला, राज्य: देवरिया, उत्तर प्रदेश
मोबाइल नंबर:
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43 मिनट पहले

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