हम तो पनघट से, प्यासे ही घर जाएंगे
बिन तेरे इश्क के, हम बिखर जायेगे
ऐसे मुझको को रुलाया नहीं कीजिए
जिंदगी चार दिन की, फिर गुजर जायेंगे ।।
हम दोनों ही, पनघट पे प्यासे खड़े।
आँखों में इश्क के थे, समंदर भरे
आंखों ही आंखों में , एक इशारा हुआ
दो कदम बो चले ,दो कदम हम चले।।
अब तो पनघट भी सूना, कुआं भी नहीं।
बस यादों का छलकता है, पानी कही
मैं प्यासा आज भी उस, पनघट पर
एक प्यास पानी की, एक तेरे इश्क़ की।
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