देख कर उस को कभी शाद हुआ करते थे
उन दिनों हम भी उसे याद हुआ करते थे
आप ने यार मोहब्बत में कमाई कर ली
लोग तो 'इश्क़ में बर्बाद हुआ करते थे
इक मोहब्बत की फ़ज़ा चारों तरफ़ होती थी
आसमाँ-ज़ादे ज़मीं-ज़ाद हुआ करते थे
तिरे होते हुए ख़ामोश सभी रहते थे
सारे हंगामे तिरे बा'द हुआ करते थे
उन की आवाज़ ही तहरीक बना करती थी
लोग जब माइल-ए-फ़रियाद हुआ करते थे
अब तो हर हुक्म पे हम सर को झुका लेते हैं
हम जो मजमू'आ-ए-अज़्दाद हुआ करते थे
वक़्त बदले तो फिर अनहोनी भी हो जाती है
आज जो सैद हैं सय्याद हुआ करते थे
~ इक़बाल नदीम
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
कमेंट
कमेंट X