सियासंग होली खेले रघुनंद
छा गया चारों ओर आनंद ।
रंग खुशी के रंग हर्ष के
रंग चढ़े थे प्रसन्न चित् के ।
रघुवर हाथ लिए पिचकारी
मोहक सीता अबीर उड़ाती ।
कनक भवन की भव्य सी होली
हर कोई बोले प्रेम की बोली ।
राम रंग में रंग गई सीता
मन में प्रेम की बहि सरिता।
बजे ढोल और ताल मृदंग
लक्ष्मण भरत उड़ा रहे रंग।
अवध में ऐसी हो रही होली
धरा पे आई देवों की टोली ।
लाल गुलाबी नीले पीले
हर कोई अपने रंग से खेले।
प्रेम की मीठी मीठी बोली
रंगों संग है हंसी ठिठोली ।
सिया रामसंग खेले, होली सियाराम संग खेले होली ।
-पायल शर्मा
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