लग जायें यदि उम्मीदों को पंख,
हो जायेंगी आसमान की दूरियां कम।
जीवन के हर सपने होंगे फिर पूरे
पूरे होंगे वो ख्वाब रह गये जो अधूरे।।
धैर्य संयम और अनुशासन का बाना,
मत सुनिए दुनिया का कोई ताना।
हो कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प
तब लग जायेंगे उम्मीदों के पंख।।
मत घबराना आसमान की दूरी से
उड़ते जाना तुम अपनी होशियारी से
लोभ लालच के दाने मत तुम चुगना
अपने पथ पर दृष्टि पक्की रखना।।
कोई पथ रोक न सकेगा तुम्हारा,
दृढ़ निश्चय हो जब सारथी तुम्हारा।
शिक्षा का दीप करेगा फिर उजियारा
जीवन में उम्मीदों का मिलेगा सहारा।।
हताशा, निराशा हैं जीवन पर भारी,
करती रहती पंख काटने की तैयारी।
ग़लत संगति से बचकर तुम रहना
अपने पथ पर तुम बढ़ते ही रहना।।
पूरी दुनिया फिर छोटी पड़ जायेगी,
तुम्हारी उम्मीदें फिर रंग लायेंगी।
पंखों की मजबूती है तुम्हारी उम्मीदें,
यही उम्मीदें मंजिल पर पहुंचायेंगी।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
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