नहीं जताना चाहता अपनी शोहरतों को ज़माने पर,
जलवे कभी-कभी ख़ल्वतों से भी बाहर आते हैं।
हमने ख़ामोशी को ही अपना अंदाज़ बना रखा है,
हर बात के चर्चे सरे-बाज़ार नहीं होते हैं।
मंज़िलों का शोर करना मेरी फ़ितरत में नहीं,
कुछ सफ़र ख़ुद अपनी पहचान बना लेते हैं।
वक़्त गवाह है हमारी सादगी का भी एक हुनर,
हम जहाँ चुप रहे, वहीं अफ़साने बन जाते हैं।
- विकास त्रिपाठी ‘विक्की’
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