आपने कैसी जिंदगी जी है यह आपके जाने के बाद पता चलता है। जीते जी तो हर किसी को तारीफ के लिए कोई ना कोई मिल जाता है मजा तो तब है जब आपकी मौत पर जमाने में हर कोई आंसू बहाए। वैसे भी एक शेर है...
'मौत वो हो जिस पर जमाना करे अफसोस
वरना तो इस दुनिया में आते हैं सभी जाने के लिए'
यह शेर बता रहा है कि आपकी मौत आपकी जिंदगी से भी हसीन हो जाती है अगर आप अपने जीवन में बेहतर ढंग से कार्य करते हैं।
जाने चले जाते हैं कहाँ,
दुनिया से जाने वाले, जाने चले जाते हैं कहाँ,
कैसे ढूंढे कोई उनको, नहीं कदमों के भी निशां
जाने वाले की याद आने पर लोग उनके कदमों के निशां खोजते हैं लेकिन मौत बड़ी बेरहम होती है। वह अपने पीछे किसी तरह का कोई निशां नहीं छोड़ती। लोग मरने के बाद कहां खो जाते हैं यह सवाल आपके व्यक्तित्व की पुकार है। दुनिया से हर किसी को जाना है पर जाने से पहले अच्छे कार्यों की वजह से लोगों मौत के बाद भी याद आती है। यह गीत इसी याद को हसीं शब्दों के साथ जीवन की कसक को पिरो रहा है।
(जाने है वो - २) कौन नगरिया,
आये जाये खत ना खबरिया,
आये जब जब उनकी यादें,
आये होठों पे फ़रियादें,
जाके फिर ना आने वाले
जाने चले जाते हैं कहाँ ...
यह गीत गायक मुकेश के लिए ही बना था...
यह गीत गायक मुकेश के लिए ही बना था। उनसे बेहतर यह गीत कोई नहीं गा सकता था। आनंद बक्षी रचित गीत के बोल जिंदगी में साथ की अहमियत बता रहा है। गहरा साथी बिछड़ता है तो वह मौत से भी ज्यादा विरह देने वाला है। अकेला साथी काले काले बादल को ही तकता रहता है। वह सावन आने की दुहाई नहीं मांगता। उसे काले बादल विरह के साथी लगते हैं।
(मेरे बिछड़े -२) जीवन साथी,
साथी जैसे दीपक बाती,
मुझसे बिछड़ गये तुम ऐसे,
सावन के जाते ही जैसे,
उड़के बादल काले काले,
जाने चले जाते हैं कहाँ
दुनिया से जानेवाले, जाने चले जाते हैं कहाँ,
कैसे ढूंढे कोई उनको, नहीं कदमों के भी निशां
जाने चले जाते हैं कहाँ ...
आप भी यहां सुनिए यह गीत...
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आये जाये खत ना खबरिया...
एक वर्ष पहले
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