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इज़हार की ललक के बीच जब घट गया इश्क़

हमदम मेरे मान भी जओ
                
                                                         
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हमदम मेरे, मान भी जाओ
कहना मेरे प्यार का  
अरे हल्का-हल्का, सुर्ख लबों पे
रंग तो है इक़रार का - २
अरे हमदम मेरे

होय
प्यार मुहब्बत की हवा, पहले चलती है
फिर इक लट इनकार की, रुख पे ढलती है - २
ये सच है कम से कम, तू ऐ मेरे सनम
लटें चेहरे से सरकाओ, तमन्ना आँखें मलती है 
हाय, हमदम मेरे 

हाय
तुमसे मिल-मिल के सबा, दुनिया महकाये
बादल ने चोरी किये, आँचल के साए  - २ 
ये सच है कम से कम, तू ऐ मेरे सनम
चुरा लूं मैं भी दो जलवे, मेरा अरमान भी रह जाये 
हाय, हमदम मेरे

दो लोगों के बीच काफी समय से चले आ रहे आंखों ही आंखों के इशारे को एक मुकम्मल मोड़ देने के दिन में हमदम मेरे मान भी जाओ... गीत काफी प्रासंगिक हो जाता है । वैलेंटाइन डे के मौके पर यहां हम इस गीत का वर्णन कर रहे हैं।

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3 वर्ष पहले

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