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इज़हार की ललक के बीच जब घट गया इश्क़

हमदम मेरे मान भी जओ
                
                                                         
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हमदम मेरे, मान भी जाओ
कहना मेरे प्यार का  
अरे हल्का-हल्का, सुर्ख लबों पे
रंग तो है इक़रार का - २
अरे हमदम मेरे

होय
प्यार मुहब्बत की हवा, पहले चलती है
फिर इक लट इनकार की, रुख पे ढलती है - २
ये सच है कम से कम, तू ऐ मेरे सनम
लटें चेहरे से सरकाओ, तमन्ना आँखें मलती है 
हाय, हमदम मेरे 

हाय
तुमसे मिल-मिल के सबा, दुनिया महकाये
बादल ने चोरी किये, आँचल के साए  - २ 
ये सच है कम से कम, तू ऐ मेरे सनम
चुरा लूं मैं भी दो जलवे, मेरा अरमान भी रह जाये 
हाय, हमदम मेरे

दो लोगों के बीच काफी समय से चले आ रहे आंखों ही आंखों के इशारे को एक मुकम्मल मोड़ देने के दिन में हमदम मेरे मान भी जाओ... गीत काफी प्रासंगिक हो जाता है । वैलेंटाइन डे के मौके पर यहां हम इस गीत का वर्णन कर रहे हैं।

 

सुहानी आवाज मन मस्तिष्क पर गहरा असर करती है...

गीत में अभिनेता विश्वजीत अपनी प्रेमिका आशा पारेख से प्रेम प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए मिन्नतें करते हैं। गीत की शुरुआत में ही गायक मोहम्मद रफी की दिल के तारों को छेड़ जाने वाली सुहानी आवाज मन मस्तिष्क पर गहरा असर करती है । 

1965 में रिलीज फिल्म मेरे सनम के इस गीत को मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा जबकि संगीत से इसे आेम प्रकाश नैयर ने सजाया । बोल और बेहतर संगीत के साथ इसमें घटे इश्क़ की वजह से मुझे यह गीत काफी प्रिय है । 
 
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सुहानी आवाज मन मस्तिष्क पर गहरा असर करती है...

3 वर्ष पहले

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