मुझे अपने दादा के बारे में यह कहानी याद है, जिनके बारे में हमेशा गर्व के साथ कहा जाता था कि उन्होंने पांच बार शुरू से लेकर अंत तक बाइबिल पढ़ी थी। उस समय अश्वेत लोगों के लिए उस पुस्तक को पढ़ना अवैध था। और श्वेत लोगों के लिए उन्हें पढ़ना सिखाना अवैध था। ऐसा करने पर आप जेल जा सकते थे या जुर्माना भरना पड़ता। मेरे दादा कभी स्कूल नहीं गए। पढ़ना सीखने के लिए वह अपनी बहन पर निर्भर थे। बहुत बाद में मैं सोचने लगी कि बाइबिल के अलावा वह और क्या पढ़ सकते थे। वहां न किताबें थीं और न ही पुस्तकालय। बस बाइबल थी। लेकिन वास्तव में यह उनके लिए अधिकार वापस पाने का एक उपक्रम था।
मेरे घर में किताबें ही किताबें हैं। मेरी मां बुक क्लब की सदस्य बन गई थीं, वह प्रतिरोध की तरह था। किताबें पढ़ने के साथ वह हर समय गीत-कथा सुनाया करती थीं। मेरी मां हमेशा गीत-कथा गाती रहती थीं-दिन, रात, किसी भी समय। उनकी आवाज बहुत सुरीली थी, वैसी मीठी आवाज मैंने अब तक नहीं सुनी। कपड़े टांगते हुए, बर्तन धोते हुए वह गाती रहती थीं। उनके गीतों की ध्वनि मेरे लेखन के लिए प्रेरणा का काम करती थी।
मैं अश्वेत लोगों के पक्ष में लिखती हूं
खुशी पाने के लिए ज्ञान हासिल करना जरूरी है। यदि आप कोई चीज जानने लगते हैं, जो पहले नहीं जानते थे, तो यही चीज ज्ञान है। और अगर मैं इसे हासिल कर लेती हूं, तो बाकी सब कुछ संभव है। पुस्तकों और जीवन में कुछ ऐसे पैटर्न होते हैं, जो दिखाते हैं कि वे किसी राह पर चल रहे हैं और फिर कुछ होता है और लोग उससे सीखते हैं। मैं अश्वेत लोगों के पक्ष में लिखती हूं, इसलिए अगर कोई मुझे अश्वेत लेखिका कहता है, तो मुझे बुरा नहीं लगता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मेरी किताब में श्वेत लोगों का वर्णन नहीं है।
-टोनी मॉरिसन, अमेरिका की नोबेलजयी अश्वेत लेखिका
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उनकी आवाज बहुत सुरीली थी
8 महीने पहले
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