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लाश तक घर को न लौटी ऐसा मक़तल भा गया

असरारूल हक मजाज़
                
                                                         
                            लाश तक  घर को न लौटी ऐसा मक़तल भा गया!
                                                                 
                            
मजाज़ जैसे मुकम्मल शायर पर एक अधूरा मज़मून! 
मजाज़ मर गए! 
मजाज़ ने खुदकुशी की!
या मजाज़ का कत्ल किया गया...  

दरअसल यह तीन अलग अलग खबरें थीं और इन तीन ख़बरों को एक ही ख़बर की कब्र में दफन कर दिया गया।  आगे पढ़ें

मौत के सिलसिले पर कुछ बेहद असरदार पंक्तियां लिखी हैं... 

4 वर्ष पहले

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