'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अचेतन, जिसका अर्थ है- चेतनारहित या जिसमें चेतना का अभाव हो। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता- काली आँखों का अंधकार
काली आँखों का अंधकार
जब हो जाता है वार पार,
मद पिए अचेतन कलाकार
उन्मीलित करता क्षितित पार-
वह चित्र ! रंग का ले बहार
जिसमे है केवल प्यार प्यार!
केवल स्मृतिमय चाँदनी रात,
तारा किरणों से पुलक गात
मधुपों मुकुलों के चले घात,
आता है चुपके मलय वात,
सपनो के बादल का दुलार
तब दे जाता है बूँद चार
तब लहरों- सा उठकर अधीर
तू मधुर व्यथा- सा शून्य चीर,
सूखे किसलय- सा भरा पीर
गिर जा पतझर का पा समीर
पहने छाती पर तरल हार.
पागल पुकार फिर प्यार-प्यार!
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
कमेंट
कमेंट X