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दिनेश त्रिपाठी 'शम्स': आईने पर यक़ीन रखते हैं

उर्दू अदब
                
                                                         
                            आईने पर यक़ीन रखते हैं ,
                                                                 
                            
वो जो चेहरा हसीन रखते हैं

आंख में अर्श की बुलन्दी है ,
दिल में लेकिन ज़मीन रखते हैं

दीन-दुखियों का है खुदा तब तो ,
आओ हम खुद को दीन रखते हैं

जिनके दम पर है आपकी रौनक ,
उनको फिर क्यों मलीन रखते हैं

विषधरों के नगर में रहना है ,
हम विवश होके बीन रखते हैं

ये सियासत की फ़िल्म है जिसमें ,
सिर्फ़ वादों के सीन रखतें हैं। 

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2 महीने पहले

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