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आज का शब्द: गैरिक और उमाकांत मालवीय की कविता- कैसे-कैसे चलन

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- गैरिक, जिसका अर्थ है- गेरू, सोना। प्रस्तुत है उमाकांत मालवीय की कविता- कैसे-कैसे चलन
                                                                 
                            

ये कैसा देश है
कैसे-कैसे चलन
अन्धों का कजरौटे करते अभिनन्दन ।

तितली के पंखों पर
बने बहीखाते
ख़ुशबू पर भी पहरे
बैठाए जाते
डरा हुआ रवि गया चमगादड़ की शरण ।

लिखे भोजपत्रों पर
झूठे हलफ़नामे
सारे आन्दोलन हैं
केवल हंगामे
कुत्ते भी टुकड़ों का दे रहे प्रलोभन ।

चाटुकारिता से
सार्थक होती रसना
क्षुब्ध चेतना मेरी
उफ़्फ़ गैरिक वसना
ज्वालामुखी बेच रहे कुल्फ़ियाँ सरीहन ।

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6 घंटे पहले

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