आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अशोक अंजुम की हास्य ग़ज़ल: प्यार है , इज़हार है बाज़ार में !

हास्य
                
                                                         
                            प्यार है , इज़हार है बाज़ार में !
                                                                 
                            
इश्क का व्यापार है बाज़ार में !

कैद दफ़्तर में रहे सप्ताह भर
और अब रविवार है बाज़ार में !

देखकर विज्ञापनों का बाँकपन
रोज कुल परिवार है बाज़ार में !

ये भी लें, हाँ ये भी लें, हाँ ये भी लें
बस यही तकरार है बाज़ार में !

बिक रहा है आम जनता का सुकूँ
और हर सरकार है बाज़ार में !

क्यों घरों में आज सन्नाटा लगे
और हर त्यौहार है बाज़ार में !

एक जादू हर तरफ़ तारी हुआ
खींचता हर बार है बाज़ार में !

जेब में सबकी लगता सेंध ये -
साथ जो उपहार है बाज़ार में

देखकर 'अंजुम' हमें ऐसा लगे
यूँ कि सब संसार है बाज़ार में !

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।   

17 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर