दीवानों का कितना मुश्किल दुनिया में जी पाना है,
घड़ियालों की बस्ती में बंदर का खेल दिखाना है।
जो धरती पर सीधा चलते हैं, वो सारे उल्लू हैं,
पेड़ों पर उल्टा लटके लोगों का ये फरमाना है।
चाहे गोमुख में ले जाकर गंगा के जल में रख दो,
लेकिन कुछ कीड़ों ने गंदे नाले में ही जाना है।
राजा जी की बगिया में है इज्जत सुंदर फूलों की,
कांटों ने मुस्तैदी से संरक्षण बाड़ लगाना है।
दूर देश को जाने वाले लड़कों, रुककर सोचो तो,
सोने जैसी साँसें देकर कंकड़-पत्थर लाना है।
चोरी, मक्कारी, खुदगर्जी, चमचागीरी, घूसखोरी—
करने वाले सारे खुश हैं, कहने पर जुर्माना है।
बेटों, सारी नौकरियों का मकसद केवल इतना है,
अपनी खुशियाँ गिरवी रखकर घर की खुशियाँ लाना है।
साभार: चित्रगुप्त की फेसबुक वाल से
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