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World Poetry Day: उर्दू के चुनिंदा शेर

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                            माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
                                                                 
                            
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
- अल्लामा इक़बाल 


वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
- साहिर लुधियानवी 

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
- बशीर बद्र 


तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि क़ाफ़िले क्यूँ लुटे
तिरी रहबरी का सवाल है हमें राहज़न से ग़रज़ नहीं
- शहाब जाफ़री
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1 सप्ताह पहले

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