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इब्न-ए-इंशा: इस को नाम जुनूँ का दे लो प्यार कहो कि दुलार कहो

ibn e insha famous ghazal is ko naam junoon ka de lo pyaar kaho ki dular kaho
                
                                                         
                            

इस को नाम जुनूँ का दे लो प्यार कहो कि दुलार कहो
ऐसा और किसी का देखा दिल का कारोबार कहो

बस्ती में दीवाना समझो दश्त में हम को ख़्वार कहो
उन से एक न एक बहाने होना था दो चार कहो

और किसी के दर पर जाएँ छोड़ के उन का द्वार मगर
ऐसी अच्छी आँखों वाले कितने हैं सरकार कहो

तुम ने हाल हमारा देखा तुम जो बाग़ ओ बहाराँ में
गुल को चाक-बदामाँ जानो नर्गिस को बीमार कहो

बीच भँवर के मंज़िल करते हम तो यूँ भी पहुँचेंगे
एक टके में ले चलते हो माँझी दरिया पार कहो

हम भी तिरे कौनैन भी तेरे दुनिया क्या और 'उक़्बा क्या
बीच में क्यूँ ऐ दोस्त उठा दी ना-हक़ की दीवार कहो

'इंशा' जी ये फ़ैज़ है किस का क्या है उस का नाम मक़ाम
हम तो रंग तुम्हारा जानें ऐसे कब अश'आर कहो

10 घंटे पहले

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