ख़ुमार निहायत सादगी पसंद थे और दिलचस्प गुफ़्तगू करते थे। हर एक से झुक के मिलते थे। शुरू में शराब पीने के बुरी तरह आदी थे लेकिन बाद में तौबा कर लिया था। उर्दू के मक़बूल शायरों में एक नाम ख़ुमार बाराबंकवी का भी है जिन्हें सुनने के लिए श्रोता दूर-दूर से आया करते थे। लोग उनके बड़े प्रशंसक थे और अपने इस पसंदीदा शायर को बड़े गौर से सुना करते थे। प्रस्तुत है ख़ुमार की ग़ज़लें से चुनिंदा अशआर
भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
दोस्तों को आज़माते जाइए
ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है
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