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राजेश रेड्डी: ख़त में उभर रही है तस्वीर धीरे धीरे

rajesh reddy famous ghazal khat mein ubhar rahi hai tasveer dheere dheere
                
                                                         
                            


ख़त में उभर रही है तस्वीर धीरे धीरे
गुम होती जा रही है तहरीर धीरे धीरे

एहसास तुझ को होगा ज़िंदाँ का रफ़्ता-रफ़्ता
तुझ पर खुलेगी तेरी ज़ंजीर धीरे धीरे

मुझ से ही काम मेरे टलते चले गए हैं
होती चली गई है ताख़ीर धीरे धीरे

तक़दीर रंग अपना दिखला रही है पल पल
बे-रंग हो चली है तदबीर धीरे धीरे

आँखों में एक आँसू भी अब नहीं बचा है
हम ने लुटा दी सारी जागीर धीरे धीरे

देखा है जब से उस को लगता है जैसे दिल में
पैवस्त हो रहा है इक तीर धीरे धीरे

आसाँ नहीं था ग़म को लफ़्ज़ों में जज़्ब करना
आई मिरे सुख़न में तासीर धीरे धीरे
 

2 दिन पहले

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