आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सैफ़ुद्दीन सैफ़: दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या

saifuddin saif famous ghazal dilon ko todne walon tumhein kisi se kya
                
                                                         
                            
दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या
मिलो तो आँख चुरा लो तुम्हें किसी से क्या

हमारी लग़्ज़िश-ए-पा का ख़याल क्यूँ है तुम्हें
तुम अपनी चाल सँभालो तुम्हें किसी से क्या

चमक के और बढ़ाओ मिरी सियह-बख़्ती
किसी के घर के उजालो तुम्हें किसी से क्या

नज़र बचा के गुज़र जाओ मेरी तुर्बत से
किसी पे ख़ाक न डालो तुम्हें किसी से क्या

मुझे ख़ुद अपनी नज़र में बना के बेगाना
जहाँ को अपना बना लो तुम्हें किसी से क्या

क़रीब-ए-नज़अ' भी क्यूँ चैन ले सके कोई
नक़ाब रुख़ से उठा लो तुम्हें किसी से क्या
2 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर