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उमैर समर: कम से कम तुम को भी मेरी याद आनी चाहिए

umair samar famous ghazal ishq mein meri tarah zahmat uthani chahiye
                
                                                         
                            


'इश्क़ में मेरी तरह ज़हमत उठानी चाहिए
कम से कम तुम को भी मेरी याद आनी चाहिए

चंद लम्हों में तुम्हें सोचा तो ग़ज़लें हो गईं
और क्या तुम को मोहब्बत की निशानी चाहिए

जिन के शजरे तक पुलिस थाने में रक्खे हैं जनाब
ऐसे लोगों को भी रिश्ता ख़ानदानी चाहिए

इस अँधेरी रात में सूरज के क्यूँ हैं मुंतज़िर
इन चराग़ों को भी कुछ हिम्मत दिखानी चाहिए

मुस्कुराना इस लिए भी फ़र्ज़ है मुझ पर 'समर'
अहल-ए-दुनिया को मिरी आँखों में पानी चाहिए

17 घंटे पहले

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