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Social Media Poetry: आदमी होने को बस मशहूर भागा जा रहा है

वायरल काव्य
                
                                                         
                            आदमी होने को बस मशहूर भागा जा रहा है,
                                                                 
                            
किन्तु वह इंसानियत से दूर भागा जा रहा है,

देखता है रोज मरते लोग खाली हाथ जाते,
फिर भी दौलत के नशे में चूर भागा जा रहा है,

दौड़ होनी चाहिए थी शांति की सौहार्द की,
युद्ध के रस्तों पे हो के क्रूर भागा जा रहा है,

भागना था चोर डाकू को पुलिस से दूर पर,
देखिये लाचार औ मज़बूर भागा जा रहा है,

खुल गए पार्लर गली के नुक्कड़ों पर हर जगह,
किन्तु चेहरे से तो असली नूर भागा जा रहा है।

साभार: अनुपम पाठक "अनुपम" की फेसबुक वाल से 

9 महीने पहले

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