पक्ष चुनने का समय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!
यदि तटस्थी भाव लेकर
तुम कहीं अटके हुये हो
तो दया के पात्र हो तुम
तुम अभी भटके हुये हो
नाचता सिर पर प्रलय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!
सभ्यता की इस नदी में
आ गये घड़ियाल कितने
उम्र बीतेगी तुम्हारी
तुम बुनोगे जाल कितने
हर दिशा में मौन भय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!
कल समय के प्रश्न भी
होंगे तुम्हारी भूमिका पर
दे सकोगे क्या भला उत्तर
उसे तुम मौन होकर
इसलिये अंतिम विनय है
सो रहे हो? जाग जाओ!
या समर में भाग लो या फिर समर से भाग जाओ!
साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से
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