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अमर उजाला शब्द सम्मान 2025: ममता कालिया और अरमबम ओंगबी मेमचौबी को 'आकाशदीप', इन्हें मिलेगा श्रेष्ठ कृति सम्मान
अमर उजाला शब्द सम्मान में सम्मानित किए जाएंगे विजेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जब तार की गूंज शब्द की गहराई से मिले
एक लेखक जिस तरह एक छोटे से दृश्य को शब्दों के माध्यम से अमर बना देता है, वैसे ही एक संगीतकार सुरों के एक छोटे-से टुकड़े से सदियों का दर्द बयां कर सकता है।
मैं एक ऐसा कहानीकार हूं, जिसका माध्यम तार हैं। संगीत अपने शिखर पर तब पहुंचता है, जब वह मानवीय आवाज की नकल करता है। वही आवाज, जो साहित्य के भार को वहन करती है। मैं जब बजाता हूं तो मैं केवल ‘सरगम’ के बारे में नहीं सोच रहा होता, मैं ‘शब्द’ के बारे में भी सोच रहा होता हूं। साहित्य संगीत को एक भावनात्मक ब्लूप्रिंट प्रदान करता है, चाहे वह गालिब की रूहानी शायरी हो या अमीर खुसरो का सूफी कलाम। भारतीय उपमहाद्वीप का साहित्य सितार की आत्मा के रूप में कार्य करता है। मेरा मानना है कि जो संगीतकार किसी छंद की गहराई को नहीं समझता, वह कभी भी राग के ‘भाव’ में महारत हासिल नहीं कर सकता।
अक्सर मुझसे पूछा जाता है कि क्या केवल सुरों का ज्ञान पर्याप्त है? मेरा जवाब हमेशा ‘नहीं’ होता है। संगीत की साधना केवल उंगलियों की कसरत नहीं है, बल्कि यह आपके भीतर के मनुष्य का परिष्कार है। साहित्य वह रास्ता है, जो हमें हमारे इतिहास और संस्कृति से मिलाता है। यदि एक कलाकार के पास शब्दों का खजाना नहीं है तो उसके सुर केवल शोर बनकर रह जाएंगे। मैं अक्सर कहता हूं कि जो मिठास एक शायर के ‘लफ्ज’ में होती है, वही मिठास मुझे सितार की ‘मींड़’ में लानी होती है। यदि मैं दाग या फैज को नहीं पढ़ूंगा तो मैं विरह या मिलन के रागों में वह तड़प कैसे पैदा करूंगा?
मैं भारतीय शास्त्रीय संगीत को ‘अलिखित साहित्य’ के रूप में देखता हूं। ऐतिहासिक रूप से हमारी परंपराएं महान महाकाव्यों की तरह मौखिक रूप से आगे बढ़ीं, इसलिए जिस तरह एक पाठक को उपन्यास के युग को समझना चाहिए, उसी तरह एक श्रोता को राग के पीछे की ‘कहानी’ को समझना चाहिए। यही नहीं, साहित्य संगीतकार की कल्पना का विस्तार करता है, जिससे वह प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ‘नायक’ या ‘नायिका’ की कल्पना कर पाता है, जो बाद में उसकी धुन में झलकता है। एक कलाकार को संगीत से ज्यादा दुनिया को पढ़ना चाहिए। जब आप दुनिया को पढ़ते हैं तो आपका संगीत खुद-ब-खुद ‘साहित्यिक’ हो जाता है। एक महान लेखक और एक महान संगीतकार, दोनों को ‘ठहराव’ की शक्ति को समझना चाहिए। साहित्य में यह पंक्तियों के बीच का खाली स्थान है, संगीत में यह ‘खाली’ या स्वरों के बीच का मौन है।
यदि एक सितार वादक किसी सुगठित वाक्य की सुंदरता को नहीं पढ़ता या उसकी सराहना नहीं करता तो उसका संगीत तकनीकी रूप से तो सटीक हो सकता है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से खोखला रहेगा। हम सितार वादकों के पास जब तार की गूंज शब्द की गहराई से मिलती है तो श्रोताओं को एक अलौकिक अनुभव प्राप्त होता है। संगीत और साहित्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक अवर्णनीय का वर्णन करने के लिए शब्दों का उपयोग करता है और दूसरा वहां पहुंचने के लिए ध्वनि का उपयोग करता है, जहां शब्द विफल हो जाते हैं। - उस्ताद शुजात हुसैन खान, मशहूर सितार वादक
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