क्या आपका आसमान भी नीला है
ट्रू कलरः द स्ट्रेंज एंड स्पेक्टेकुलर क्वेस्ट टू डिफाइन कलर-फ्रॉम एजुरे टू जिंक पिंक
लेखक : कोरी स्टैम्पर
31 मार्च को लॉन्च हुई यह किताब बताती है कि रंग हमारी सोच, पहचान व अनुभव को किस तरह से चुपचाप नियंत्रित करते हैं। रंगों का नामकरण कैसे हुआ, इसके पीछे के विज्ञान, उद्योग व राजनीति के जटिल संबंधों को भी यह पुस्तक उजागर करती है।
क्या जो नीला रंग मुझे दिखाई देता है, वह वैसा ही है, जैसा आपको दिखता है? क्या मेरा लाल रंग आपके लिए भी लाल ही है? ये ऐसे प्रश्न हैं, जिन्हें भाषा की सीमाओं और मानवीय अनुभव की अबूझता को टटोलता हुआ कोई बाल-दार्शनिक पूछ सकता है। ये ऐसी पहेली भी हैं, जिन्होंने लंबे वक्त से कलाकारों, वैज्ञानिकों, मानवशास्त्रियों और शब्दकोश बनाने वालों को उलझाए रखा है।
कोरी स्टैम्पर अपनी नई किताब, ट्रू कलर में बताती हैं, ‘रंग हमारे मानवीय अनुभव का इतना अभिन्न हिस्सा हैं कि हम इसके बिना किसी दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते। यह हमारे जीवन का उतना ही जरूरी हिस्सा है, जितना कि हवा, पानी व टैक्स। यह परेशान करने वाला, लुभाने वाला और पकड़ में न आने वाला है।’
शब्दकोश-विशेषज्ञ स्टैम्पर ने जब 1998 में विशाल ‘वेबस्टर्स थर्ड न्यू इंटरनेशनल डिक्शनरी’ के संशोधन पर काम करना शुरू किया, तभी से रंगों की परिभाषाओं पर मोहित हो गईं। इसी दौरान उन्होंने रंगों के शेड्स को बताने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुछ अनोखे शब्द भी देखे-जैसे कि ‘बेगोनिया’, ‘फिएस्टा’, और सबसे ज्यादा हैरान करने वाला, ‘सी पिंक’। स्टैम्पर के लिए, समुद्र का संबंध नीले, हरे और भूरे रंगों से था, पर लाल रंग के किसी भी शेड से नहीं। उन्होंने सोचा, यह परिभाषा बनी कैसे? उनकी इसी हैरानी ने उन्हें शब्दकोश की ‘साइटेशन फाइल्स’, जिनमें हर प्रविष्टि का इतिहास दर्ज था, पर एक दशक तक शोध करने के लिए प्रेरित किया। इस शोध में पारिवारिक अभिलेख, सरकारी दस्तावेज और वैज्ञानिक रिपोर्टों के आधार पर रंगों के नामकरण के इतिहास और शब्दकोश निर्माण की प्रक्रिया का संक्षिप्त, पर जीवंत विश्लेषण किया गया।
यह किताब अपनी बात पर अड़े रहने वाले और उन जिद्दी किरदारों से भरी है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी सटीकता को समर्पित कर दी थी। इनमें खास तौर पर गॉडलोव शामिल हैं, जो 1931 में रंग के विवरणों के मानकीकरण के लिए गठित प्रभावशाली ‘इंटर-सोसायटी कलर काउंसिल’ के शुरुआती सदस्यों में से एक थे। गॉडलोव की दिलचस्प जीवन यात्रा से होकर ही बीसवीं सदी में रंग विज्ञान, रंग मनोविज्ञान और रंग उत्पादन गुजरे। स्टैम्पर कई गुमनाम महिला रसायनशास्त्रियों का भी उल्लेख करती हैं, विशेष रूप से गॉडलोव की पत्नी मार्गरेट का, जो एक रंग वैज्ञानिक थीं और जिन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद भी इस शब्दकोश में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
स्टैम्पर की किताब रंगों के बारे में है, पर साथ ही यह एक ऐसी दार्शनिक रचना भी है, जो बारीकी से यह समझाती है कि किसी भी चीज को परिभाषित करने का असल मतलब क्या होता है। अमूर्त रूप में रंग का क्या अर्थ होता है? आपके लिए रंग का क्या तात्पर्य है? स्टैम्पर लिखती हैं, ‘जब संदर्भ से रहित खाली जगह में रंगों का वर्णन करने की बात आती है, तो यह सब कुछ कृत्रिम-सा लगता है।’ यह बिल्कुल भाषा जैसा ही है, यानी यह देखने लायक तभी बनती है, जब यह बाहर की किसी चीज के बारे में हो।
रंगों से जुड़े शब्दों, रंगों के बारे में दिलचस्प तथ्यों से भरपूर और स्टैम्पर की कभी न खत्म होने वाली जिज्ञासा से प्रेरित यह किताब दुनिया को देखने के आपके नजरिये को पूरी तरह बदल देगी।
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