आज कल सोशल मीडिया का प्रभाव हम सब पर इतना अधिक बढ गया है कि हम सब की किताब पढ़ने की आदत बहुत कम हो गई है। यहाँ तक कि अब बिल्कुल ही खत्म होती जा रही है। फिजिकल किताब का हाथ में न होगा हमें इस आदत से और भी दूर ले जा रहा है।
आज हम सोशल मीडिया के इतने प्रभाव में हैं कि हमारी पुस्तक पढ़ने की समय सीमा घट गई है और स्क्रीन टाइम बहुत बढ गया है। जिसका नकारात्मक प्रभाव लोगों पर दिखने लगा है। चेहरे पर थकान, तनाव, चिड़चिड़ापन आदि बढ़ते जा रहे हैं।
वर्ल्ड ऑफ स्टैटेटिक्स ने वैश्विक स्तर पर इस विषय पर एक अध्ययन किया है जिसमें बताया गया है कि किताब पढ़ने के मामले में भारत पहले स्थान पर है। अध्ययन के अनुसार प्रत्येक भारतीय प्रति सप्ताह लगभग 10 घंटे 42 मिनट किताबों के साथ बिताते हैं। वहीं 9 घंटे 24 मिनट के साथ थाईलैंड दूसरे स्थान पर और 8 घंटे की दर से किताब पढ़ने के मामले में चीन तीसरे स्थान पर है। किताबों के साथ सबसे कम समय दक्षिण कोरिया के लोग बिताते हैं, दक्षिण कोरिया के लोग किताबों के साथ लगभग 3 घंटे 6 मिनट का समय बिताते हैं। जापान के लोग 4 घंटे और ताइवान के लोग मात्र 5 घंटे सप्ताह किताब पढ़ने में बिताते हैं।
वहीं अगर अन्य विकसित देशों की बात करें तो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम में किताब पढ़ने की औसत समय लगभग 5 घंटे साप्ताहिक है।
रेडसीर स्ट्रेटेजी कंसल्टेंट्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 7.3 घंटे प्रति दिन स्क्रीन टाइम पर, भारतीय अपने स्मार्टफोन का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर ऑनलाइन मैसेजिंग, सोशल मीडिया, यूट्यूब स्ट्रीमिंग, ओटीटी सामग्री और शॉर्ट फॉर्म वीडियो के लिए करते हैं।
हमें अपनी स्क्रीन टाइम को कम करना चाहिए और प्रति दिन कम से कम 1 घंटा तो किताबों के लिए निकालना ही चाहिए। हम अपनी रीडिंग में रुचि के अनुसार मनचाही किताब शामिल कर सकते हैं ताकि पढ़ने के प्रति इच्छा जागृत हो। हमें देख कर हमारे बच्चों में भी किताब पढ़ने की आदत पड़ेगी।
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