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Hindi Kavita: हुल्लड़ मुरादाबादी की कविता 'तुम रूहानी शे'र पढ़ोगे, पब्लिक सब भग जाएगी'

hullad moradabadi hasya kavita achcha hai par kabhi kabhi
                
                                                         
                            

बहरों को फ़रियाद सुनाना, अच्छा है पर कभी-कभी
अंधों को दर्पण दिखलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

ऐसा न हो तेरी कोई, उँगली ग़ायब हो जाए
नेताओं से हाथ मिलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

बीवी को बंदूक़ सिखाकर तुमने रिस्की काम किया
अपनी लुटिया आप डुबाना, अच्छा है पर कभी-कभी

हाथ देखकर पहलवान का, अपना सिर फुड़वा बैठे
पामिस्ट्री में सच बतलाना, अच्छा है पर कभी-कभी

तुम रूहानी शे'र पढ़ोगे, पब्लिक सब भग जाएगी
भैंस के आगे बीन बजाना, अच्छा है पर कभी-कभी

घूँसे-लात चले आपस में, संयोजक का सिर फूटा
कवियों को दारू पिलवाना, अच्छा है पर कभी-कभी

पच्चीस डॉलर जुर्माने के पीक थूकने में ख़र्चे
वाशिंगटन में पान चबाना, अच्छा है पर कभी-कभी

10 महीने पहले

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