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सूंड फैजाबादी की हास्य कविता: रिश्तेदारों का कोई भरोसा नहीं 

सूंड फैजाबादी की हास्य कविता: रिश्तेदारों का कोई भरोसा नहीं
                
                                                         
                            जाने कब मेरी आंखों में धूल झोकें मेरी
                                                                 
                            
रिश्तेदारों का कोई भरोसा नहीं 

सांप पर तो भरोसा है हमको मगर
अपने यारों का कोई भरोसा नहीं 

आम के पेड़ पर भिंडी लगी
इन बहारों का कोई भरोसा नहीं 

एक बीमार कल नर्स को ले उड़ा
इन कुंवारों का कोई भरोसा नहीं 

कोई महिला कहीं पर सुरक्षित नहीं
थानेदारों का कोई भरोसा नहीं 

(सूंड फ़ैज़ाबादी की हास्य कविता 'कोई भरोसा नहीं' के चुनिंदा अंश)
एक वर्ष पहले

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