आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जयशंकर प्रसाद: वे कुछ दिन कितने सुंदर थे?

jaishankar prasad famous hindi kavita ve kuch din kitn sundar the
                
                                                         
                            


वे कुछ दिन कितने सुंदर थे?
जब सावन-घन सघन बरसते—
इन आँखों की छाया भर थे!
सुरधनु रंजित नव-जलधर से—
भरे, क्षितिज व्यापी अंबर से,
मिले चूमते जब सरिता के,
हरित कूल युग मधुर अधर थे

प्राण पपीहा के स्वर वाली—
बरस रही थी जब हरियाली—
रस जलकन मालती-मुकुल से—
जो मदमाते गंध विधुर थे।
चित्र खींचती थी जब चपला,
नील मेघ-पट पर वह विरला,
मेरी जीवन-स्मृति के जिसमें—
खिल उठते वे रूप मधुर थे। 
 

एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर