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केदारनाथ अग्रवाल की कविता- गांधी के चित्र को देखकर

कविता
                
                                                         
                            दुख से दूर पहुँचकर गाँधी।
                                                                 
                            
सुख से मौन खड़े हो
मरते-खपते इंसानों के
इस भारत में तुम्हीं बड़े हो

जीकर जीवन को अब जीना
नहीं सुलभ है हमको
मरकर जीवन को फिर जीना
सहज सुलभ है तुमको

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16 घंटे पहले

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