आज हिमालय का सर उज्ज्वल
सागर खड़ा बेड़ियाँ तोड़े
कौन तरुण जो उठे
समय के घोड़े का रथ बाएँ मोड़े
आई है व्रत ठान लाड़ली
आज नर्मदा के स्वर बोली
सोचा था वसंत आएगा
और हर्ष ले आया होली
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