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Hindi Poetry: ज़ख्म इतने दिए जमाने ने

कविता
                
                                                         
                            ज़ख्म इतने दिए जमाने ने 
                                                                 
                            
आंसू न समाएंगे पैमाने में,
हाल दिलों का क्या बताएं तुम्हें 
ग़म ग़लत करते रहे मयखाने में।

दर्द परवाने का चरागों से पूछो 
क्या रखा है जल जाने में।
पूछ रही है दुनिया 
दीवानों के जाने के बाद 
क्या छिपा था उसके अफसाने में।

अपने रंजो ग़म जो वह बयां न कर सका,
लिखता रहा वह नज़्म, ग़ज़ल गानों में।

-राकेश धर द्विवेदी 

3 महीने पहले

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