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‘सफ़र’ पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

सफ़र शायरी
                
                                                         
                            जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान-ए-सफ़र
                                                                 
                            
कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं

- अहमद फ़राज़


अब के सफ़र में दर्द के पहलू अजीब हैं
जो लोग हम-ख़याल न थे हम-सफ़र हुए

- खलील तनवीर
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5 वर्ष पहले

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