आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Hindi Ghazal: कौन है ? किसको क़रार है भैया

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कौन है ? किसको क़रार है भैया।
                                                                 
                            
सबके दिल में ग़ुबार है भैया ।

अश्रु बनके लहू टपकता है , 
सबके दिल में दरार है भैया ।

पेट पर, पीठ पर अजाने से , 
चाबुकों का प्रहार है भैया ।

नब्ज से कुछ पता नहीं चलता , 
हड्डियों में बुखार है भैया ।

निम्न पहले ही पिसे थे अब तो , 
बीच वालों पे मार है भैया ।

पौन महिने में चुक गया सारा , 
कितना कमती पगार है भैया। 

भाव सुरसा का मुँह हुए जाते , 
कितना ऊँचा बज़ार है भैया।

ज़िन्दगी एक है लेकिन उस पर , 
हादसे बेशुमार हैं भैया।  

नकद मिलती है यहाँ तकलीफें , 
पर खुशी तो उधार है भैया ।

व्यर्थ है  चीख इन सुरंगों में , 
कौन सुनता पुकार है भैया। 

कितना बेस्वाद अलोना जीवन , 
उस पे फीका बघार है भैया ।

कल नशे का चढ़ाव था शायद , 
आज उसका उतार है भैया ।

हर बशर करवटें बदलता है , 
क्योंकि दिल बेक़रार है भैया ।

कोई घाटी न शिखर हो जिसमें , 
सबका जीवन पत्थर है भैया ।

लोग लोगों से डर रहे हैं ज्यों , 
पास सबके कटार है भैया। 

ऐसा आतंक रोज ही हर पल , 
मौत का इंतजार है भैया । आगे पढ़ें

12 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर