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चंद्रशेखर आजाद और उनका आत्मदर्शन: श्रीकृष्ण सरल

चंद्रशेखर आजाद और उनका आत्मदर्शन: श्रीकृष्ण सरल
                
                                                         
                            श्रीकृष्ण सरल उन भारतीय कवियों और लेखकों में से एक हैं जिन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों पर अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें पन्द्रह महाकाव्य हैं। सरल जी ने अपना सम्पूर्ण लेखन भारतीय क्रांतिकारियों पर ही किया है। उन्होंने लेखन में कई विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सर्वाधिक क्रांति-लेखन और सर्वाधिक महाकाव्य (पन्द्रह) लिखने का श्रेय सरलजी को ही जाता है। 1 जनवरी 1919 ई० को मध्य प्रदेश के गुना जिले के अशोक नगर में पैदा हुए श्री कृष्ण सरल ने अमर शहीद 'चन्द्र शेखर आजाद' पर एक खण्डकाव्य लिखा है। प्रस्तुत है खण्डकाव्य चंद्रशेखर आजाद से चुनिंदा अंश-   
                                                                 
                            

चन्द्रशेखर नाम, सूरज का प्रखर उत्ताप हूँ मैं,
फूटते ज्वालामुखी-सा, क्रांति का उद्घोष हूँ मैं।
कोश जख्मों का, लगे इतिहास के जो वक्ष पर है,
चीखते प्रतिरोध का जलता हुआ आक्रोश हूँ मैं।

विवश अधरों पर सुलगता गीत हूँ विद्रोह का मैं,
नाश के मन पर नशे जैसा चढ़ा उन्माद हूँ मैं।
मैं गुलामी का कफन, उजला सपन स्वाधीनता का,
नाम से आजाद, हर संकल्प से फौलाद हूँ मैं। 
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5 वर्ष पहले

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