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'अमीर' क़ज़लबाश की 5 जिंदादिल ग़ज़लें

उर्दू कविता-गज़ल
                
                                                         
                            'अमीर' क़ज़लबाश ने भी अपनी शायरी और ग़ज़लों में दुनिया की एक जिन्दा तस्वीर पेश की है। उनकी कुछ ग़ज़लों में जिन्दगी की जिंदादिली देखते ही बनती है।  हम ऐसी ही चुनिंदा ग़ज़लों का यहां आपसे परिचय कराने जा रहे हैं।   
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

जैसे हर शख़्स इम्तिहान में है...

इक परिंदा अभी उड़ान में है
तीर हर शख़्स की कमान में है

जिस को देखो वही है चुप-चुप सा
जैसे हर शख़्स इम्तिहान में है

खो चुके हम यक़ीन जैसी शय
तू अभी तक किसी गुमान में है

ज़िंदगी संग-दिल सही लेकिन
आईना भी इसी चटान में है

सर-बुलंदी नसीब हो कैसे
सर-निगूँ है के साए-बान में है

ख़ौफ़ ही ख़ौफ़ जागते सोते
कोई आसेब इस मकान में है

आसरा दिल को इक उम्मीद का है
ये हवा कब से बाद-बान में है

ख़ुद को पाया न उम्र भर हम ने
कौन है जो हमारे ध्यान में है
आगे पढ़ें

जैसे हर शख़्स इम्तिहान में है...

5 वर्ष पहले

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