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आधुनिक शमशेर अपनी भावुक भारतीयता को कभी भुला नहीं पाए

शमशेर बहादुर सिंह
                
                                                         
                            हिंदी साहित्य में शमशेर बहादुर सिंह आधुनिक और प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित होने के बावजूद अपनी भावुक भारतीयता को ता उम्र भूल नहीं पाए और इसी की वजह से ये मुझे पसंद आते हैं| पढाई के दौरान दोस्तों के बीच इनके काव्य को लेकर अक्सर बहस हुआ करती थी,बहस के बाद उनके काव्य को पढ़ने का मन करता गया और शमशेर मुझे और पसंद आते गए| अज्ञेय और उनकी आधुनिक हिंदी कविता के पैरोकार शमशेर की कविताओं में भारतीय संस्कृति की छटा बिखरती रही और उनके इसी भारतीय लगाव की वजह से मन उनका मुरीद हो गया |     
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी हासिल हुआ...   

उनमे किसी केन्द्रगामी विचार-तत्व का प्रायः अभाव रहा। अभिव्यक्ति और वर्ण-विग्रह, वर्ण-संधि के आधार पर नयी शब्द-योजना के प्रयोग से किसी ठोस विचार तत्त्व की अपेक्षा अधिक महत्त्व रखती है। पर शमशेर यहां पर किसी खास निष्कर्ष पर खरे उतरते नहीं दिखते हैं|  तार सप्तक से शुरुआत करने वाले शमशेर का जन्म १३ जनवरी १९११ को देहरादून में हुआ था और निधन १२ मई १९९३ को हुआ| चुका भीं नहीं हूँ मैं रचना की वजह से उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी हासिल हुआ|   
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उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी हासिल हुआ...   

5 वर्ष पहले

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