इस युग में अब कोई धर्म ऐसा आए
जो हैवान को भी इंसान बनाएं
आग जलती है हर दरिया में
अब तू ही बता कहाँ नहाया जाए
मेरी तकलीफ़ का असर हो कुछ ऐसा
कि जब मैं तड़पूँ तो तू भी रोये जाए
हर इंसान के दिल में जज़्बा हो ऐसा
जब कोई रोएँ तो उसे दिल में बसाया जाए
-अभय ‘अवधी’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X