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ताज भोपाली: आज दिल सोच रहा है जैसे, मय हर इक ग़म की दवा है जैसे

taj bhopali famous ghazal aaj dil soch raha hai jaise may har ek gham ki dawa hai jaise
                
                                                         
                            


आज दिल सोच रहा है जैसे
मय हर इक ग़म की दवा है जैसे

जाँ हथेली पे लिए फिरते हैं
इक यही शर्त-ए-वफ़ा है जैसे

कहीं मोती कहीं तारे कहीं फूल
दहर तेरी ही क़बा है जैसे

दश्त-ए-ग़ुर्बत में तिरा नामा-ए-शौक़
हाथ में फूल खिला है जैसे

इस तरह चुप हैं तिरा ग़म ले कर
ये भी क़िस्मत का लिखा है जैसे

2 दिन पहले

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