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बाबा साहेब के सपनों की ओर...

                
                                                         
                            बाबा साहेब के सपनों की ओर....
                                                                 
                            

सुबह का सूरज बुला रहा है तुमको,
रात के जादू को तोड़ जागो तुमको।

सुबह के फूलों की खुशबू से,
अब संसार महक उठेगा,
गर तुम अब भी न उठोगे,
तो दम तुम्हारा घुट जाएगा।

उठो संसार के फरिश्तों,
और कर्म करो अपना,
तुम कर्म करोगे तो,
देश बढ़ेगा अपना।

यही एक सपना संजोए है,
हर हिंदुस्तानी मन में,
तुम्हारी पहचान बनेगी,
तुम्हारे कर्मों की धुन में।

सुनाएंगे उन्हें हम,
वक़्त की ज़ुबानी,
जैसे सुनाता है वक़्त,
इतिहास की कहानी।

आ रहा है जन्मदिन,
उस ज़मीं के फ़रिश्ते का,
जिसने रचा संविधान,
हमारे भारतवर्ष का।

कहते हैं उसे हम सब,
डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर,
बाबा साहेब हमारे,
हमारी नज़र के तारे अमर।

तुम सो रहे हो प्यारो,
तोड़ उनके सपने सारे,
अभी भी वक़्त है, संभल जाओ,
ओ मेरे देश के प्यारे।

वरना घटेगा यदि कर्म,
मिट जाएगा सब कुछ,
न रहोगे तुम, न बचेगा,
इस जीवन का कोई सुख।

बाबा साहेब के सपनों को,
हमको है पूरा करना,
आओ अहद करें हम सब,
कर्म पथ पर आगे बढ़ना।

उगते हुए सूरज संग,
कदम हमें बढ़ाना,
वक़्त की ताल से ताल मिलाकर,
आगे ही बढ़ते जाना...

हमको है आगे बढ़ना...
-आचार्य अमित
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