जन-मन-गण केवल नहीं, यह आत्मा की पुकार,
हर धड़कन में बसता है मेरा देश अपार।
मिट्टी की खुशबू में बसा अपनापन अनजान,
हर कण में बसता है मेरा हिंदुस्तान।
नदियों की कल-कल, पर्वतों का अभिमान,
सूरज-सी चमक लिए खड़ा है मेरा हिंदुस्तान।
विविधता के रंगों में एकता का श्रृंगार,
अलग-अलग होते हुए भी एक है हर परिवार।
धर्म, पंथ, जात-पात की दीवारें हों चाहे,
प्रेम की डोर सबको एक साथ लाए।
हँसी, आँसू, खुशियाँ—सबका एक ही मान,
दिल से दिल को जोड़ता है मेरा हिंदुस्तान।
तिरंगा लहराए जब नभ के बीचों-बीच,
हर दिल में जाग उठे देशभक्ति की सींच।
केसरिया त्याग और साहस की पहचान,
श्वेत शांति का, सच्चाई का गान,
हरा समृद्धि और जीवन का अरमान—
तीनों मिलकर बनाते भारत महान।
चक्र की चौबीस तीलियाँ देती यह संदेश,
रुकना नहीं, बढ़ते रहना—यही है सच्चा देश।
हर कदम पर आगे बढ़ने का है यह प्रमाण,
यही है मेरे भारत की सच्ची पहचान।
सीना तान के चलता है हर भारतवासी यहाँ,
देश के लिए जीना ही सबसे बड़ा सम्मान।
ऊँचाइयों से भी ऊँचा है इसका मान,
भारतीय होना मेरा गर्व, मेरी पहचान।
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