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जौन एलिया: साल-हा-साल और इक लम्हा, कोई भी तो न इन में बल आया

jaun elia famous qita saal ha saal aur ik lamha koi bhi toh na in mein bal aaya
                
                                                         
                            जौन एलिया - क़ितआ 
                                                                 
                            

1. साल-हा-साल और इक लम्हा
कोई भी तो न इन में बल आया
ख़ुद ही इक दर पे मैं ने दस्तक दी
ख़ुद ही लड़का सा मैं निकल आया

2. शर्म दहशत झिझक परेशानी
नाज़ से काम क्यूँ नहीं लेतीं
आप वो जी मगर ये सब क्या है
तुम मिरा नाम क्यूँ नहीं लेतीं 

3. चारासाज़ों की चारा-साज़ी से
दर्द बदनाम तो नहीं होगा
हाँ दवा दो मगर ये बतला दो
मुझ को आराम तो नहीं होगा

4. जो हक़ीक़त है उस हक़ीक़त से
दूर मत जाओ लौट भी आओ
हो गईं फिर किसी ख़याल में गुम
तुम मिरी आदतें न अपनाओ

5. चाँद की पिघली हुई चाँदी में
आओ कुछ रंग-ए-सुख़न घोलेंगे
तुम नहीं बोलती हो मत बोलो
हम भी अब तुम से नहीं बोलेंगे 
 
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