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प्रिय मृत्यु............

                
                                                         
                            मैंने चाहा है तुम्हें हर दर्द के बाद , माना ये था स्वार्थ मेरा,
                                                                 
                            
परंतु सच्चे अर्थों में चाहा है ,साथ तेरा।

माना कि भयाभह होता है तेरा आना, लोग डरते हैं ,
नजदीकियों से तेरी ,पर मैं करूंगी स्वागत तेरा।

क्योंकि मुझे मोहब्बत है तुमसे बेपनाह ,
मैं जानती हूँ तुम बनोगी मेरी महबूबा।

ये प्रेम मुझे तुम पर अनायास नहीं आया है ,
इसे मेरे जीवन ने बुलाया है।

तुमसे पहले भी इश्क किया था मैने ,
व्यक्ति ,वस्तु ,स्थानों और सफलताओं से ।

देखो उनकी तरह तुम भी मुझे तनहा छोड़ न जाना ,
सब्र बहुत कम है मुझमें ,तुम जरा जल्दी आना।

देखो यदि अपनाया मैने तुम्हे तो लगाए जाएंगे इल्ज़ाम,
रस्सी ,पंखों, जहर की शीशियों पर।

इतनी सी अरदास मांन लो मेरी ,तुम मुझे गले लगाना,
आते ही बांहों में भर लेना मुझे ,मुझे सहारे की आरजू है तेरे।

कंधे पे सिर रखके सुलाना मुझे अनंतकाल के लिए,
फिर मुझे कभी न जगाना ,सुनो तुम जरा जल्दी आना।

मैं जानती हूं तुमसे मिलते ही मिट जाएंगी सारी परेशानियां मेरी,
और मैं मुक्त हो जाऊंगी इस असहनीय पीड़ा से।

सदियों से है इंतजार तेरा , ये मौत तू आती क्यों नहीं ,
क्या तुझे भी नजर नहीं आता दर्द मेरा ,तू गले लगती क्यों नहीं।

प्रेम सच्चा है मेरा ,ये साबित करके दिखाऊंगी ,
तू न भी आय में तेरी कल्पनाओं में वक्त बिताएंगी ।

जीवन जिऊंगी इंतजार में तेरे , मृत शव के सामान,
अब बस जब तू आएगी ,तभी करूंगी चिर विश्राम।
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17 घंटे पहले

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