तुम ही तुम हो मेरे हमनवां मेरे हम सफ़र
जहां तक जाती है मेरी नज़र
कोई ओर मुझसे तुमको चुरा नहीं सकता
लड़ जाऊंगी मैं ख़ुदा से भी
ख़ुदा भी तुम्हे मेरे सिवा किसी ओर का
बना नहीं सकता
तुम ही तुम हो मेरे हमनवां........
मेरी ज़िंदगी के हर फहर की दुआं में
तुम ही तुम हो
मेरी जुस्तजू मेरा अरमान तुम हो
बिन तुम्हारे मेरा वज़ूद क्या है
तुमसे ही शुरू तुम पे ही खत्म मेरी दास्तां है
तुम ही तुम हो मेरे हमनवां मेरे हम सफ़र
जहां तक जाती है मेरी नज़र ।।
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