जाति-धरम की दीवारों को, मिलकर आज ढहाना है,
भेदभाव को तजकर हमको, आगे कदम बढ़ाना है।
नज़रअंदाज़ न हो कोई भी, हर नागरिक अनमोल यहाँ,
सबका साथ मिले जब हमको, स्वर्ग बनेगा देश वहाँ।
सृजन कार्य की अलख जगाकर, नया इतिहास बनाना है,
हाथों में ले हाथ सभी का, नव-निर्माण सजाना है।
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, समता का दीप जलाएँगे,
सच्ची देशभक्ति से अपनी, सोई राष्ट्र-चेतना जगाएँगे।
नफरत, हिंसा और कलह से, अब रिश्ता दूर निभाना है,
प्रेम, दया और मानवता का, हर आँगन में गान सुनाना है।
मजहब चाहे अलग-अलग हों, पर दिल सबके एक रहें,
भारत माँ की सेवा खातिर, कदम सभी के नेक रहें।
श्रम, साहस और सद्भावों से, नवयुग का निर्माण करें,
अपने कर्मों की उजियारी से, जन-जन का कल्याण करें।
एकता की शक्ति से मिलकर, हर संकट को हराना है,
उन्नति के पथ पर भारत को, विश्व-शिखर तक लाना है।
वीर सपूतों की धरती पर, ऐसा सुंदर काम करें,
मिल-जुलकर हम प्रेम-सद्भाव का, जग में ऊँचा नाम करें।।
-अनिल कुमार सोनी
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