फासले कम हो न पाए
साथ भी हम हो न पाए
ये नहीं कि चाह कम थी
जो था फाजिल खो न पाए
जिक्र था तेरी हँसी का
और हम थे रो न पाए
तेरे ख्वाबों ने जगाया
फिर कभी हम सो न पाए
रह गईं मिलने से खुशियां
दूर ग़म भी हो न पाए
दीवारों के ये इबारत
बारिशों में मिट न जाएं
आजमाया खूब हमने
हौसले मिटने न पाए
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