सावन का महीना आया।
कई त्योहार साथ ले आया।
सावन की बारिश की बौछार,
और उस पर झूलों का श्रृंगार।
हर पेड़, बाग़ में नाच रहे हैं मोर,
हरी चूड़ियों की खनखनाहट का मच रहा है शोर।
बन-ठनकर निकलती हैं भारतीय नारी,
इनकी सुंदरता तो अप्सराओं पर पड़ रही है भारी।
पूजा की थाली लेकर जब मंदिर में जाएगी,
त्याग, सुंदरता, प्यार, समर्पण की देवी कहलाएगी।
माँ पार्वती की सुख के सावन के व्रत की परम्परा,
भारतीय नारी भक्तिभाव से निभाएगी।
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