अपनी लघुता की सीमा में
कितने ही फूल खिलाये,
पर बेमोले कपटी भृंगें
सब मधुर चुरा ले जाये!
तुमको आता न रोना
मुझको न आवे हंसना,
तब कैसे होगा, बोलो
मिलने का पूरा सपना!
कब जागेगा मेरा यह
जीवन का नवल सवेरा,
या मिला ही मुझको केवल
अपना यह विरल अंधेरा?
देखो जब मैं मिट जाऊं
तो तुम विस्मित न होना,
हां,मुझमें विश्व समाया
चाहता पर तुझमें खोना!
—अनमोल
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